शरीर में जाकर कैसे काम करती है गर्भनिरोधक गोली और कितनी खतरनाक है,जान लेंगी तो कभी खाएंगी नहीं

अनचाहे गर्भ से बचने का सहसे आसान व आम तरीका गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन है। मगर ये गर्भनिरोधक गोलियां स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से बहुत ही हानिकारक होती हैं। हाल ही में एक शोध में सामने आया है कि इनका सेवन मष्तिष्क में ब्लड क्लॉट करता है जिस वजह से कई मानसिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दुनियाभर में लगभग 10 करोड़ से ज्यादा महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं। डेनमार्क के एक मेडिकल रिकॉर्ड से बात सामने आईं कि जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियां लेती है उनमें तवान बढ़ जाता है। इसके अलावा डिप्रेशन की समस्या भी हो सकती है जो हमे कई दिमागी समस्याए दे सकता है। अगर आप भी अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए इन गोलियों को सेवन करते है तो सतर्क हो जाए। जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं उनमें से कई की मौत खून का थक्का जमने से हो जाती है। इसके अलावा भी यग गोलियां शरीर को कई तरीके से नुकसान पहुंचाती है। आइए जानते है कैसे।

कई शोध से पता चला है कि र्भनिरोधक गोलियों में मौजूद प्रोजेस्टेरॉन और एस्ट्रोजन हार्मोन के साइड-इफेक्ट से शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। जिस वजह से महिला का वजन भी बढ़ने लगता है। मोटी महिला के लिए खतरनाक : चिकित्‍सक हमेशा ज्‍यादा वजन वाली महिलाओं को गर्भनिरोधक गोलियां न लेने की सलाह देते है क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य के लिए अधिक खतरनाक हो सकती हैं।

तेजी से बढ़ता वजन : जो महिलाएं 21 दिन के कोर्स वाली गर्भनिरोधक गालियां लेती है, इससे उनका वजन तो तेजी से बढ़ेगा साथ ही उल्टियां भी हो सकती हैं।प्रतिरोधक क्षमता कमजोर : इन गोलियों के सेवन से महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाते है जिस वजह से उनमें कई अन्‍य बीमारियां होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

गर्भनिरोधक गोलियां कैसे करती हैं काम : हमें अक्सर बताया जाता है कि गोली में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन होता है। लेकिन किसी भी गोली में इस तरह का कोई हार्मोन नहीं पाया जाता है। इसका कारण यह है कि मौखिक रूप से लिए जाने पर, एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन व्यावहारिक होने के लिए बहुत जल्दी टूट जाते हैं। इसकी जगह, गर्भनिरोधक गोलियों में कृत्रिम स्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन होते हैं, जो अधिक स्थिर हार्मोन से बने होते हैं और जो असली हार्मोन की तरह ही होते हैं। बाजार में संयुक्त गोली के प्रत्येक ब्रांड में सिंथेटिक एस्ट्रोजेन, एथिनिल एस्ट्रैडियोल और आठ सिंथेटिक प्रोजेस्टेरोनों में से एक होता है, जिसे प्रोजेस्टिन कहा जाता है।

एथिनिल एस्ट्रैडियोल गर्भाशय में मौजूद अंडों को निषेचित होने से रोक देता है, जबकि प्रोजेस्टिन गर्भाशय के प्रवेश द्वार पर गर्भाशय को मोटा करते हैं और गर्भ को ठहरने नहीं देते। हालांकि, गर्भावस्था को रोकने में हार्मोन प्रभावी होते हैं, लेकिन वे हमारे प्राकृतिक हार्मोन के साथ सही से मिल नहीं पाते हैं। जिसके कारण इन सिंथेटिक हार्मोन का हमारे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ये भी हो सकता है कि इसकी वजह से आपके शरीर में कभी प्राकृतिक प्रोजेस्टेरोन न बन पाए।