बहुत सालों से चला रहा था अपने साहब की गाड़ी, रिटायमेंट के दिन इस अधिकारी ने अपने ड्राइवर को दिया ऐसा गिफ्ट की रो पड़ा ड्राइवर

जैसा के हम सभी जानते है की आज के इस आधुनिक समाय में पैसो का महत्व इतना अधिक हो गया है की जिस इंसान के पास पैसा नहीं है ओर वह गरीब है तो समाज में हिकारत भरी नज़रो से देखता जाता है. लेकिन इन सब के बावजूद भी हमारे देश में आज भी बहुत सारे ऐसे लोग है जो अपनी दरियादिली से समाज में एक मिशाल कायम कर देते है, ये लोग न तो गरीबी देखते है ओर न व्यक्ति की हैशियत.

एक ऐसा ही मामला अभी देखने को मिला जब एक बड़ा अधिकारी विदाई समारोह में अपने ड्राइवर को ऐसा गिफ्ट दिया जिससे उसकी आंख से आ गए आंसू. काफी लंबे सालो तक जो ड्राइवर अपने अधिकारी को सरकारी वाहन में घर, दफ्तर और अन्य जगहों पर ले जाता था, वह जब रिटायर हुआ तो उसी अधिकारी ने ड्राइवर को गाड़ी की फ्रंट सीट पर बैठाया और खुद ड्राइव कर घर तक छोड़ा.

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नौकरी के अंतिम दिन अधिकारी खुद ड्राइवर बनकर उसी तरह अपने ड्राइवर को घर तक छोड़ने गए, जिस प्रकार ड्राइवर उन्हें वाहन में लेकर जाता था। यह वाकया है जल संसाधन विभाग के ड्राइवर रमेश शर्मा और उनके अधिकारी एसडीओ अवधेश सक्सेना का.

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दरअसल, जल संसाधन विभाग के अंतर्गत सिंध परियोजना दाहिनी तट नहर संभाग करैरा के स्थायी कर्मी रमेश शर्मा 31 जनवरी को रिटायर हो गए। इस अवसर पर आयोजित विदाई समारोह में विभाग के वरिष्ठ अनुविभागीय अधिकारी अवधेश सक्सेना ने माल्यार्पण कर और शॉल श्रीफल देकर रमेश शर्मा का सम्मान किया। साथ ही उनकी निष्ठापूर्ण सेवाओं के लिए उन्हें प्रशस्ति-पत्र भी दिया.

सीनियर एसडीओ श्री सक्सेना ने श्री शर्मा के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं दीं। विदाई समारोह के बाद वाहन की ड्राइविंग सीट पर अनुविभागीय अधिकारी अवधेश सक्सेना बैठे और ड्राइवर के बगल की सीट पर जहां अक्सर में वे खुद बैठते थे, वहां रमेश शर्मा को बैठाया, फिर एसडीओ खुद गाड़ी ड्राइव कर शर्मा को उनके घर तक छोड़ने गए. यह एक ऐसा भावुक पल था जिसे रमेश शर्मा पूरी जिंदगी याद् रखना चाहते है.

एसडीओ सक्सेना ने नौकरी पर रखा, उन्हीं से मिला सेवानिवृति का पत्र

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ड्राइवर रमेश शर्मा ने कहा, साहब ने मेरे लिए जो गिफ्ट दिया है, वो पूरी जिंदगी याद रहेगी. इसे एक संयोग की बात की कहेंगे कि सक्सेना साहब ने ही मुझे नौकरी पर रखा था। आज उन्हीं के हाथ से रिटायरमेंट का पत्र ले रहा हूं। यह कहते हुए रमेश रो पड़े। यह देखकर सक्सेना ने उन्हें गले से लगा लिया.