पाकिस्तानी लड़की ने भेजी प्राइवेटपार्ट की फोटो. …फोटो देखकर जवान कर बैठा ये घिनोना काम

राजस्थान के जैसलमेर से हनी ट्रैप का मामला सामने आया है।

यहां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ी एक महिला ने भारतीय सैनिक को हनी ट्रैप में फंसाकर कई गोपनीय जानकारी हासिल कर ली हैं।

फिलहाल जयपुर से इंटेलीजेंस की विशेष टीम जैसलमेर पहुंच चुकी है और जवान से पूछताछ कर रही है।

जानकारी के मुताबिक जवान का नाम सोमवीर सिंह है और वह जैसलमेर सैन्य स्टेशन में तैनात है। वह हरियाणा के रोहतक का रहने वाला है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़ी युवती ने फेसबुक पर अनिका चोपड़ा नाम से प्रोफाइल बनाकर सोमवीर सिंह से दोस्ती की।

उसने अपने प्राइवेट फोटो दिखाकर जवान को फंसाया। इसी दौरान उसने कई खुफिया जानकारियां हासिल कर लीं। इससे पहले जवान महाराष्ट्र के अहमदनगर में तैनात था।

उसके पास जम्मू के नंबरों से फोन आते थे। उसी वक्त ये मामला सुरक्षा एजेंसियों के सामने आया। तभी से इस जवान पर नजर रखी जा रही थी। सूत्रों का कहना है कि जवान ने महिला से कई बार वीडियो चैटिंग भी की है।

क्या है हनीट्रैप :

दुनिया का हर देश हर वक्त अपने दुश्मन को मात देने की कोशिशों में लगा रहता है। हर वक्त सीधी जंग नहीं होती और हर बार केवल जंग के मैदान में ही मात नहीं दी जाती।

खुफिया तरीकों से भी दुश्मन को मात दी जाती है। इस खुफिया खेल में बहुत बड़ी भमिका निभाता है – हनीट्रैप। जैसा नाम से ही जाहिर है हनी यानि शहद और ट्रैप मतलब जाल।

एक ऐसा मीठा जाल जिसमें फंसने वाले को अंदाजा भी नहीं होता कि वो कहां फंस गया है और किसका शिकार बनने वाला है।

खूबसूरत महिला एजेंट्स सेना के अधिकारियों को अपने हुस्न के जाल में फंसाती हैं और उनसे महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लेती हैं।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI भी अक्सर भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना से जुड़े लोगों को हनीट्रैप में फंसाने की कोशिश करती रहती है।

एक ताजा मामले में वायुसेना के अरुण मारवाह को हनीट्रैप में फंसाया गया और उनसे काफी जानकारी हासिल कर ली गई।

अमूमन इस तरह की जानकारियों का इस्तेमाल आतंकी हमले में किया जाता है। दुश्मन जानकारी का क्या इस्तेमाल करेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी क्या है और कितनी गोपनीय है।

सोशल मीडिया के जरिए फंसाया जाता है :

अभी तक का ट्रेंड देखें तो पता चलता है कि सोशल मीडिया के जरिए सेना से जुड़े लोगों को फंसाया जाता है। ये जरूरी नहीं कि सामने जो लड़की बातें कर रही है वो वास्तव में लड़की ही हो।

कई बार पुरुष एजेंट, महिला बन कर बातें करते हैं। इसके लिए फेक प्रोफाइल्स बनाई जाती हैं। ये इस कदर असली दिखती हैं कि इन पर भरोसा कर लिया जाता है।

भरोसा हासिल करने के लिए नंबरों का आदान प्रदान :

सेना से जुड़े लोगों का भरोसा हासिल करने के लिए मोबाइल नंबरों का आदान प्रदान भी किया जाता है और whatsapp जैसे टूल्स से भी चैटिंग की जाती है।

इस तरह की चैटिंग के दौरान अंतरंग तस्वीरें, बेहद निजी राज आदि जान लिए जाते हैं और फिर ब्लैकमेल करने में इनका इस्तेमाल किया जाता है।

कई बार खुद को बताती हैं विदेशी :

कई केसों में ऐसा देखा गया है कि लड़की खुद को किसी यूरोपियन देश या फिर अमेरिका का बताती है। कई बार लड़की खुद को किसी अखबार या मैगजीन से जुड़ा बताती है।

ऐसे में यह लोग सेना अधिकारियों को थोड़ी जानकारी देने के एवज में अच्छा पैसा ऑफर करते हैं। सैन्य प्रतिष्ठानों की तस्वीरें शेयर करने को भी कहा जाता है।

हनी ट्रैप का इतिहास :

ऐसा पहला मौका नहीं है कि पाकिस्तान की आईएसआई ने हनी ट्रैप जैसे हथकंडे का इस्तेमाल किया हो। अमेरिका, रूस, चीन या फिर जापान जैसे देशों का भी इस तरह के हथकंडे इस्तेमाल करने का इतिहास रहा है।

हनी ट्रैप के मामले में सबसे अधिक नाम लिया जाता है माताहारी का, वो एक प्रसिद्ध जासूस थीं।

जिनका वास्तविक नाम मार्गरेट गीरत्रुइदा मारग्रीत मैकलाऑयद (Margaretha Geertruida “Margreet” MacLeod) था। वह कामोत्तेजक नृत्यांगना थी। प्रथम विश्वयुद्ध में उन्हें जर्मनों की तरफ से फ्रांस की जासूसी करने के आरोप में गोली मार दी गयी थी।

हनी ट्रैप में फंसने वाले अकेले नहीं हैं मारवाह :

भारतीय सेना में सूबेदार के तौर पर काम करने वाले पाटन कुमार पोद्दार हनीट्रैप में फंस चुके हैं।

पाटन तब संयुक्त आंध्रप्रदेश के सिंकदाराबद छावनी में पोस्टेड थे। पाटन कुमार ने भी हुस्न के जाल में फंसकर कई सैन्य जानकारियां लीक कर दी थीं।

इससे पहले चर्चित पठानकोट हमले में भी हनीट्रैप की भूमिका सामने आई थी। एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात एयरमैन सुनील कुमार पर जानकारियां लीक करने का आरोप लगा था।

इस मामले में मीना रैना नाम की लड़की की भूमिका सामने आई थी। जिसने सुनील कुमार को जानकारियों के एवज में रकम भी अदा की थी।

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